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Home > TEXTBOOKS > Hindi Books > Parivarik Vidhi > 2nd Edition 2010, Reprint 2018 |
मुस्लिम विधि का यह द्वितीय संस्करण पूर्णतः संशोधित है। इसमें लेखक ने 2008 तक के लगभग सभी महत्वपूर्ण वादों; (cases) को उन पर दिए गए न्यायिक-निर्णयों सहित समाहित किया है। इसके साथ ही साथ इसमें न्यायविदों के लेख, उलेमाओं के फतवे, विधिवेकताओं द्वारा समय-समय पर पुस्तकों एवं विधि की शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित विशेषज्ञ लेख तथा विधि के लेखन में विषयान्तर्गत विचार इन सभी का अद्यतन विश्लेषण भी दिया गया है।
पुस्तक में मुस्लिम विधि से संबंधित सभी महत्वपूर्ण विषयों मेहर, तलाक, भरण-पोषण अथवा नफ़क़, वक़्फ़, अग्रकय अथवा शुफ़ा, उतराधिकार इत्यादि पर अधुनातन और पर्याप्त सामग्री दी गई है। बदलते समय की आवश्यकताओं ने मुस्लिम विधि के ताने-बाने में काफी बदलाव किए। इस प्रकार मुस्लिम विधि के रूढि़गत सिद्धांतों में जो सुधार हुए हैं, उन सभी को लेखक ने समाहित किया है। उनसे सम्बद्ध आवश्यक सभी सांविधानिक पक्षों को उसने विस्तार में दिया है। समस्याओं और उदाहरणों के माध्यम से विषय को भलीभांति स्पष्ट किया है।
पुस्तक की भाषा सरल और समझने योग्य है तथा शैली प्रवाहपूर्ण है। विषय का प्रस्तुतीकरण पर्याप्त स्पष्ट है। तकनीकी हिन्दी शब्दों के साथ न केवल समानान्तर अंग्रेजी शब्द दिए गए हैं बल्कि उर्दू शब्दों को भी बराबर स्थान दिया गया है। पुस्तक का प्रत्येक शब्द सारगर्भित है।
यह नवीनतम संस्करण स्नातकोत्तर (LL.M.) विद्यार्थियों प्रतियोगी परीक्षार्थियों और अधिवक्ता क्षेत्र के पाठकों के लिए नितांत उपयोगी सिद्ध होगा।
1. मुस्लिम विधि की अवधारणा एवं प्रष्ठभूमि
2. भारत में मुस्लिम विधि: प्रयोग एवं निर्वचन
3. निकाह (विवाह)
4. मेहर
5. तलाक
6. धर्मजत्व एवं जनकता
7. संरक्षता
8. भरण पोषण अथवा नफक
9. वक्फ
10. हिबः
11. अग्रकय अथवा शुफा
12. वसीयत
13. संपत्ति का प्रशासन एवं ऋणों का भुगतान
14. उत्तराधिकार
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