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ए गाइड टू सिविल प्रैक्टिस - A Guide to Civil Practice (in Hindi) ए गाइड टू सिविल प्रैक्टिस - A Guide to Civil Practice (in Hindi)
ए गाइड टू सिविल प्रैक्टिस - A Guide to Civil Practice (in Hindi)
by Basanti Lal Babel
Edition: 1st Edition, 2013
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Product Details:
Format: Paperback
Pages: 620 pages
Publisher: Eastern Book Company
Language: Hindi
ISBN: 9789350289006
Dimensions: 24.2 CM X 16 CM
Shipping Weight: 0.886(Kg)
Publisher Code: NA
Date Added: 2015-09-12
Search Category: Hindibooks
Jurisdiction: Indian
Overview:

वकालत या प्रैक्टिस  करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के समक्ष सबसे पहली समस्या आती है कि किस क्षेत्र में प्रैक्टिस करें, सिविल या फिर क्रिमिनल । सिविल मामलों में प्रैक्टिस का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है किन्तु – क्रिमिनल की आपेक्षा अधिक क्लिष्ट और कठिन भी है। दूसरी समस्या ये है कि वकालत की बारीकिया किस गुरू से सीखी जाए¡। विद्वान लेखक डॉ. बसन्ती लाल बाबेल की ये बहुपयोगी पुस्तक 'ए गाइड टू सिविल प्रैक्टिस’ इन्हीं सारी समस्याओं का एक समाधान है। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने वकालत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बातों का ज़िक्र  सरल और सहज भाषा में किया है। पुस्तक को वकालत के चरणबद्ध दस खण्डों में बाँटा गया है जिनमें प्रमुख हैं- अधिवक्ता एवं विधि व्यवसाय, सिविल न्यायालयों की अधिकारिता एवं सिविल प्रकृति के वाद, अभिवचन, वादों का प्रस्तुतिकरण, निर्णय-लेखन, नि:शुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत एवं लोकहित वाद, साक्ष्य, परिसीमा, शीर्षस्थ न्यायालय एवं रिट अधिकारिता, दस्तावेज़ लेखन। प्रत्येक खण्ड में विषय से जुड़ी प्रचुर सामग्री दी गई है। इसके अतिरिक्त सन् 2012 तक के न्यायालयी निर्णयों को स्थान दिया गया है।

पुस्तक में यथास्थान प्रारूप इत्यादि भी दिए गए हैं ताकि पाठकों को कठिनाई न हो।

 

पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य अधिवक्ताओं को सिविल क्षेत्र में प्रैक्टिस करने के लिए प्रोत्साहित करना, विषय सामग्री को सरल भाषा में उपलब्ध कराना, सिविल मामलों की विचारण प्रक्रिया से अवगत कराना, तथा व्यवसायिक आचार संहिता के बारे में बताना तथा दस्तावेज़ लेखकन को सुगम बनाना है।

 

आशा ही नहीं वरन् विश्वास भी है कि यह कृति सिविल मामलों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति, अधिवक्ता, एवं न्यायिक अधिकारियों के लिए उपयोगी एवं सार्थक सिद्ध होगी।


Table Of Contents:

भाग-1 - अधिवक्ता एवं विधि व्यवसाय

  1. अधिवक्ता एवं विधि व्यवसाय
  2. विधि व्यवसाय करने का अधिकार
  3. अधिवक्ताओं का नामांकन
  4. अधिवक्ताओं का अधिकार
  5. अधिवक्ताओं के कर्तव्य
  6. अधिवक्ताओं के लिए निषिद्ध कार्य
  7. एक कुशल अधिवक्ता के गुण
  8. बार-बैंच संबंध
  9. वृत्तिक अवचार
  10. न्यायालय का अवमान

भाग-2 - सिविल न्यायालयों की अधिकारिता एवं सिविल प्रकर्ति के वाद

  1. सिविल न्यायालय एवं उनकी अधिकारिता
  2. सिविल प्रकृति के वाद
  3. विचाराधीन न्याय
  4. प्राङन्याय 
  5. अपरवाद का वर्जन एवं विदेशी निर्णय
  6. विशिष्ट मामलों में वाद
  7. लोक विषयों के संबंध में वाद
  8. अचल सम्पत्ति  के बंधकों के संबंध में वाद
  9. अन्तराभिवचनीय वाद
  10. विचारण पूर्व की तैयारी

भाग-3 – अभिवचन

  1. अभिवचन : परिभाषा, उद्देश्य एवं महत्व
  2. अभिवचन के नियम
  3. अभिवचन में दी जाने वाली विशिष्टियाँ
  4. अभिवचन की अन्य औपचारिकतायें
  5. अभिवचनों में संशोधन
  6. वादपत्र
  7. वादपत्र में की जाने वाली अतिरिक्त विशिष्टियाँ
  8. वादपत्र का लौटाया जाना एवं ख़ारिज़ किया जाना
  9. वादपत्र के  प्रारूप
  10. लिखित के कथन
  11. प्रतिसादन  एवं प्रतिदावा
  12. लिखित कथन की अन्तव्रस्तुएँ 
  13. लिखित कथन के प्रारूप
  14. अपील
  15. अपील का प्रारूप
  16. पुनविलोकन
  17. पुनरीक्षण

भाग-4 - वादो का प्रस्तुतीकरण

  1. वादों का प्रस्तुतीकरण
  2. वाद संस्थित करने का स्थान
  3. समन
  4. पक्षकारों की उपस्थिति
  5. पक्षकारों का परीक्षण
  6. दस्तावेज़ो प्रस्तुतीकरण
  7. विवाद्यकों की विरचना
  8. साक्षियों का परीक्षण
  9. मुख्य परीक्षा, प्रति -परीक्षा एवं पुन:परीक्षा
  10. संक्षिप्त विचारण
  11. कमीशन
  12. रिसीवर
  13. निर्णय से पूर्व गिरफ्तारी एवं कुर्की
  14. अस्थायी व्यादेश
  15. स्थगन
  16. वादों  का अन्तरण
  17. विविध

भाग-5 - निर्णय-लेखन

  1. प्रारम्भिक
  2. निर्णय एवं डिक्री
  3. निर्णय के मूलभूत सिद्धान्त
  4. निर्णय की अन्तर्वस्तुएँ 
  5. डिक्री की अन्तर्वस्तुएँ
  6. निर्णय का सुनाया जाना
  7. निर्णय में संशोधन
  8. अपील का निर्णय
  9. ब्याज एवं ख़र्चे
  10. डिक्रीयों का निष्पादन
  11. निर्णय के प्रारूप

भाग-6 - नि: शुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत एवं लोक हित वाद

  1. नि: शुल्क विधिक सहायता
  2. लोक अदालत
  3. स्थायी लोक अदालत
  4. लोक हित वाद
  5. सामाजिक अनुयोजन वादकरण
  6. पैरा-लीगल सर्विसेज
  7. अविधिक सेवा प्राधिकरण
  8. विधिक सेवा समितियाँ

भाग-7 – साक्ष्य

  1. साक्ष्य की परिभाषा एवं प्रकार
  2. साक्षियों की सक्षमता
  3. साक्षियों के परीक्षण के सामान्य सिद्धान्त
  4. परीक्षण की परिसीमाएँ
  5. साक्षी की वि’वसनीयता पर अधिक्षेप
  6. साक्षियों का परीक्षण
  7. साक्षियों का लेखबद्ध किया जाना
  8. साक्ष्य का मूल्यांकन
  9. सबूत का भार

भाग-8 – परिसीमा

  1. प्रारम्भिक
  2. वादों, अपीलों एवं आवेदनों में परिसीमा
  3. परिसीमा काल की संगणना
  4. अभिस्वीकृति
  5. विविध

भाग-9 - शीर्षस्थ न्यायालय एवं रिट अधिकारिता

  1. उच्चतम न्यायालय
  2. उच्च न्यायालय
  3. रिट अधिकारिता

भाग-10 - दस्तावेज़ लेखन

  1. प्रारम्भिक
  2. विक्रय-विलेख
  3. बंधक-विलेख
  4. पट्टा-विलेख
  5. विनिमय-विलेख
  6. दान-विलेख
  7. वसीयत
  8. दत्तक-विलेख
  9. भागीदारी-विलेख
  10. विभाजन-विलेख
  11. पारिवारिक समझौता-विलेख
  12. प्राधिकार-पत्र (पॉवर आँफ एटॉर्नी)
  13. क़रार

परिशिष्ट 'क' - अधिवक्ता अधिनियम, 1961

परिशिष्ट 'ख' - न्यायालय अवमान अधिनियम, 1971

परिशिष्ट 'ग' - विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987


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